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monkey

उड़ान

आसमान कम लगता था,
        कभी थी उड़ान ऊंची इतनी;
एक तेरी खुदगर्ज़ी ने,
        मुझे रेत छानना सिखा दिया ||

स्याही से खून पसीने की,
        तक़दीर खुद अपनी लिखी थी;
आंसुओं की ऐसी लहर बही,
        कागज़ फिर कोहरा बना दिया ||

इल्ज़ाम तुझे सब दे-देकर,
        मन हल्का करने का मन है;
कमबख्त इबादत में तेरी,
        ये हक भी दिल ने गवा दिया ||

जो चुरा के इतनी खुश थी तू,
        अब गम न कर उन पंखों का;
उड़कर मुझको क्या करना है?
        अम्बर झुक कर मुझे चूमेगा ||




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